शनिवार 7 नवंबर 2026 - 18:23
अमेरिका पतन की कगार पर!

ईरान की धरती पर लगभग 48 वर्ष पहले तानाशाही व्यवस्था के अंत के बाद इस्लामी क्रांति सफल हुई थी। उस समय से लेकर आज तक अमेरिका लगातार ईरान के पीछे पड़ा हुआ है और उसकी स्थिरता, अस्तित्व तथा विकास के रास्ते में तरह-तरह की अनुचित और अमानवीय बाधाएं खड़ी करता रहा है।

लेखक: मौलाना ज़हूर मेहदी मौलाई

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की धरती पर लगभग 48 वर्ष पहले तानाशाही व्यवस्था के अंत के बाद इस्लामी क्रांति सफल हुई थी। उस समय से लेकर आज तक अमेरिका लगातार ईरान के पीछे पड़ा हुआ है और उसकी स्थिरता, अस्तित्व तथा विकास के रास्ते में तरह-तरह की अनुचित और अमानवीय बाधाएं खड़ी करता रहा है।

यह एक खुली सच्चाई है कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान में इस्लामी क्रांति के परिणामस्वरूप स्थापित शासन व्यवस्था को समाप्त करने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया है। लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह, उनके अन्यायपूर्ण और क्रूर कदमों से प्रभावित हुए बिना ईरान लगातार हर क्षेत्र में स्थिरता और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसके विपरीत अमेरिका और इज़राइल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखने वाले लोग जानते हैं कि अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ जो युद्ध शुरू किया था, उसके दुष्परिणाम केवल इज़राइल और मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इसका प्रभाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था, रक्षा प्रणाली, जनमानस, अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ा है।

आइए, इन प्रभावों पर विस्तार से नजर डालते हैं।

1. आर्थिक संकट और महंगाई

यह सर्वविदित है कि इस युद्ध के कारण तेल, डीजल, पेट्रोल, उर्वरक और परिवहन की लागत में काफी वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं महंगी हो गई हैं। (1)

इस महंगाई ने अमेरिकी जनता को मौजूदा सरकार से नाराज करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2. रक्षा बजट पर बढ़ता दबाव

इस युद्ध ने अमेरिका के सैन्य और रक्षा बजट को भी काफी प्रभावित किया है। इसके कारण मौजूदा अमेरिकी सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुमान के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 तक इस युद्ध पर लगभग 38 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे।

हालांकि, सैन्य उपकरणों, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और सैन्य ठिकानों के रखरखाव पर होने वाला खर्च इसके अतिरिक्त है। (2)

3. राजनीतिक मतभेदों में वृद्धि

ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध ने देश के भीतर राजनीतिक मतभेदों को और गहरा कर दिया है। यही कारण है कि युद्ध की अवधि, उस पर होने वाले खर्च और इसके परिणामों, जैसे जनहानि तथा आर्थिक नुकसान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी आलोचना सामने आई है। इसके साथ ही आम जनता की ओर से विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित की गई हैं।

अमेरिकी समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की अधिकांश जनता इस युद्ध का कड़ा विरोध कर रही है। (3)

4. राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता तनाव

इस युद्ध के कारण अमेरिकी राजनीतिक दलों के बीच भी तनाव काफी बढ़ गया है।

विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लेख के अनुसार, मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में हार का सामना करना पड़ा।

यह हार इतनी स्पष्ट थी कि ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी इसकी वजहों को स्वीकार करना पड़ा। दोनों ने माना कि इस हार के पीछे ईरान के साथ हुआ युद्ध भी एक प्रमुख कारण था। (4)

5. अमेरिकी विदेश नीति को बड़ा झटका

इस युद्ध ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ उसके राजनीतिक संबंधों को भी गहराई से प्रभावित किया है।

इस युद्ध के बाद खाड़ी देशों में ईरान को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और उन्हें यह एहसास हुआ है कि अमेरिका क्षेत्र में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में काफी हद तक नाकाम रहा है।

यही वजह है कि अमेरिका के प्रति इन देशों के भरोसे में काफी कमी आई है। हालांकि, लेख के अनुसार, भारी आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय नुकसान उठाने के बावजूद ये देश अब भी अमेरिका का साथ देने के लिए मजबूर हैं।

दूसरी ओर, अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा और क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के लिए अमेरिका को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। इस स्थिति ने अमेरिकी विदेश नीति को एक कठिन दौर में पहुंचा दिया है। (5)

6. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और दबदबे को नुकसान

अमेरिका ने पूरी दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में अपनी जो छवि बना रखी थी, लेखक के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध ने उसे गंभीर चुनौती दी है। इस युद्ध ने अमेरिकी सैन्य शक्ति और क्षमता को लेकर दुनिया में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लेख में कहा गया है कि ईश्वरीय शक्ति और कृपा से अब अमेरिका के पतन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

इसके विपरीत, ईश्वर सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ तथा महान और तत्वदर्शी प्रभु ने इस युद्ध के दौरान इस्लामी गणराज्य ईरान को पूरी दुनिया में ऐसी प्रतिष्ठा, सम्मान, गरिमा और प्रभाव प्रदान किया है, जो बहुत कम देशों के हिस्से में आता है।

संदर्भ एवं स्रोत

1- USDA — Food Price Outlook, October 2026

2- Every CRS Report

3- Reuters-Ipsos Survey

4- ABC News

5- Every CRS Report

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